रुद्राक्ष जिसका शाब्दिक अर्थ है रूद्र धन अक्ष अर्थाात भगवान शिव के आंसु । रुद्राक्ष भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसके स्पर्श करने से, पेहेन्ने से या जपन करने से समस्त पापों का नाश होता है । भोग और मोक्ष दोनों की ही इक्छा रखने वाले शिवभक्तों को रुद्राक्ष जरूर धारण करना चाहिए।
पूर्वकाल में तीनो लोको के स्वामी स्वयं भगवान शिव ने माता पारवती के सामने रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन किया था। तो आइये जानते हैं रुद्राक्ष की उत्पत्ति और महिमा की कहानी।
एक समय की बात है भगवान शिव ने हजारो वर्षो तक घोर तपस्या की। फिर एक दिन भगवान का मन क्षुब्ध हो उठा और उन्होंने लीलावश अपने दोनों नेत्र खोल दिए, खोलते ही उनकी आँखों से जल की कुछ बूंदे गिरी। आंसुओ की उन बूंदो से वहां रुद्राक्ष नाम का एक वृक्ष उत्पन्न हो गया और भगवान शिव के वो आंसू रुद्राक्ष के रूप में साकार हो गए।
तो इस प्रकार रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई। आइये जानते हैं रुद्राक्ष कितने प्रकार के होते हैं और उनका क्या क्या महत्त्व है।
रुद्राक्ष ४ रंगो में पाया जाता है। ये ४ रंग हैं- श्वेत यानि सफ़ेद, रक्त यानि लाल, पीट यानि पीला और कृष्ण यानि काला। मनुष्यो में सफ़ेद रुद्राक्ष ब्राह्मण ,लाल क्षत्रिय, पीला वैश्य और कला शुद्रो के लिए उत्तम बताया जाता ह।
आकर
सामान आकर वाले, मजबूत ,संपूर्ण, कांटेदार रुद्राक्ष आपकी मनोकामना पूर्ण करने में ज्यादा उपयोगी है तथा टूटा -फूटा, खंडित, कीड़े द्वारा खाया गया या चिकना रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहिए। कुछ रुद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से ही छेद होता है वह सर्वोतम्म माना जाता है बाकि रुद्राक्ष में हम माला में पिरोने के लिए कृतिम रूप से छेद करते हैं उससे वह माध्यम मना जाता है ।
प्रकार
रुद्राक्ष के अनेक प्रकार बताये गए हैं और वो अलग अलग फल देने वाले है। एक मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात् शिव का रूप है वह भोग और मोक्षरुपी फल देने वाला है। दो मुखी रुद्राक्ष देवेश्वर कहा गया है। तीन मुख वाला रुद्राक्ष साधन सिद्ध करता है, यदि आप किसी प्रकार की विद्या को अर्जित करना चाहते हैं तो उसमे मदद करता है । ४ मुख वाले रुद्राक्ष की ब्रह्म रूप में पूजा की जाती है यह आपको चारो तरीके की पुरुषार्थ का फल देता है। धर्म अर्थ काम मोक्ष। पंच मुखी रुद्राक्ष को रूद्र रूप माना जाता है यह आपकी सभी कामनाओ को पूरा करता है तथा आपसे जो भी पाप कृत्य होते हैं उनसे आपको निर्व्रत करता है। ६ मुखी रुद्राक्ष को कार्तिक के रूप में जाना जाता है , इसको हमे दाएं हाथ में बांधना चाहिए और सप्त मुखी रुद्राक्ष को मुख्यता हम धन प्राप्ति के लिए पेहेनते है। अष्ट मुखी रुद्राक्ष को हम भैरव का रूप मानते हैं और इसे दीर्ध आयु के लिए पेहेनते हैं ताकि हम आकाल मृत्यु को प्राप्त न हों। ९ मुखी रुद्राक्ष को माँ दुर्गा माँ अम्बा देवी का रूप माना जाता है और इसे बाएं हाथ में धारण करना चाहि। १० मुखी रुद्राक्ष को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है और इससे धारण करने से आपके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। ११ मुखी रुद्राक्ष को सूर्य देव का रूप माना जाता है इससे मस्तक या केशो पर धारण करना चाहिए। इसी प्रकार १२ मुखी रुद्राक्ष को भी भगवन सूर्य का रूप माना जाता है उसको भी माथे पर धारण करना चाहिए। तैरह मुख वाले रुद्रअक्ष विश्वदेवो का रूप है उसको धारण करने वाले मनुष्य की सभी अभीष्ट वस्तुए सिद्ध होती हैं। इसी प्रकार चतुर्दशी जो १४ मुख वाला रुद्राक्ष है उसको स्वयं भगवान शिव का रूप माना जाता है और इसको माथे पर धारण करने से मनुष्य के संपूर्ण पाप कट जाते हैं।
रुद्राक्ष धारण करने के स्थान
रुद्राक्ष को माथे पर यानि मुकुट के रूप में , माला के रूप में गले पर, माला के रूप में दोनों भुजाओं पर शिखाओं पर कानों में और कमर पर और जनेऊ के रूप में भी धारण किया जा सकता है । इस प्रकार कुल ११०० रुद्राक्ष धारण करने को सर्वोत्तम बताया गया है। सर पर ईशान मंत्र से, कान में तत्पुरुष मंत्र से, गले और हृदय में अघोर मंत्र से, दोनों हाथो में अघोर बीज मंत्र से एवम उदार पे वामदेव मंत्र से रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
रुद्राक्ष कौन धारण कर सकता है?
रुद्राक्ष को सभी वर्ण के लोग, पुरुष- स्त्री सभी लोग धारण कर सकते हैं। रुद्राक्ष धारी मनुष्य को मास मदिरा प्याज लहसुन आदि का त्याग कर देना चाहिए ।
रुद्राक्ष को कब धारण कर सकते हैं ?
रुद्राक्ष को आप दिन में और रात में दोनों समय में धारण कर सकते हैं। आप दिन में उतार कर सिर्फ रात में धारण कर सकते और रात में उतार कर सिर्फ दिन में भी धारण कर सकते हैं। माना जाता है की जप करते समय रुद्राक्ष की माला पेहेन कर जपें या रुद्राक्ष की माला से ही जप करें तो वो वह अति उत्तम हैं।
रुद्राक्ष धारण करने से आपके मन की मान्छित कमानों की पूर्ती होती है आपको कभी युद्ध में पराजय नहीं देखनी पड़ती आपको कभी आकाल मृत्यु को प्राप्त नहीं होते। आप हमेशा स्वस्थ रहते हैं, आपको किसी प्रकार के रोग नहीं सताते हैं। रुद्राख धारण करने वाले मनुष्य के पास कभी भूत, प्रेत, गृह पिचाश डाकिनी, शाकिनी तथा अन्य विनाशकारी राक्षश नहीं आते।
तो इस तरह भगवान शिव ने जैसा रुद्राख का महिमामंडन माता पारवती के सामने किया था, हमने आप लोगो को बताय। आपको यह लेख पसंद आया हो तो कमैंट्स में लिखे धन्यवाद ।

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