आखिर क्यों भगवान श्री कृष्णा को आया भीष्म पितामाह पर गुस्सा ? क्यों श्री कृष्ण को शस्त्र उठाने पड़े।
नमस्कार दोस्तों हमारे चैनल भक्ति वेदांत में आपका स्वागत है।
जैसा की हमे पता है की भगवान श्री कृष्णा ने महाभारत में युद्ध न करने का प्रण लिया था। फिर भी युद्ध में ऐसा क्या हुआ की वो अपना वचन तोड़ने की सीमा पर पहुँच गए।
महाभारत के युद्ध को आठ दिन बीत जाने के पश्चात् भी पांडवो की विजय की कोई आशा ना दिखाई देती थी। क्यूंकि पितामह भीष्म कौरवों की ओर से युद्ध क्षेत्र में डटे हुए थे। वो अकेले ही हर रोज़ पांडवों के 10,000 से अधिक सैनिकों का वध कर रहे थे। विजय की कोई आशा नज़र न आते देख । श्री कृष्णा ने अर्जुन से कहा। जब तक तुम भीष्म पितामह का वध नहीं करते पांडवों की विजय नहीं हो सकती। अतः तुम पूर्ण यत्न करके तुरंत ही भीष्म का वध कर डालो।
परन्तु अर्जुन मन लगा कर युद्ध नहीं कर पा रहे थे। उनका मन बार बार पितामह के प्रति कोमलता धारण कर लेता था। अर्जुन के द्वारा निष्फल प्रयत्नों को देख और भीष्म द्वारा पांडव सेना का संहार होता देख श्री कृष्णा क्रोधित होकर अर्जुन को उत्तेजित करने हेतु रथ से कूद पड़े और स्वयम ही एक रथ का पहिया उठा कर भीष्म का वध करने के लिए उद्यत हो गए। भगवान श्री कृष्णा को अपनी और आते हुए देख भीष्म बाण को धनुष पे चढ़ाते हुए बोले - "हे श्री कृष्णा ! आज निश्चित ही आपके द्वारा मेरा वध होने से मैं धन्य हो जाऊंगा।"
यह देख अर्जुन ने तुरंत रथ से उतर कर श्री कृष्णा को रोकते हुए उनके पैर पकड़ लिए और कहा -" हे केशव ! कृपया आप अपना प्रण न तोड़ें, आपने कहा था की में युद्ध नहीं करूँगा। आप अपना वचन निथ्य न होने दीजिये, और में वचन देता हूँ की में सभी अस्त्र शस्त्रों का प्रयोग करके किसी भी तरह महारथी भीष्म का वध कर दूंगा। यह सुनकर भगवान श्री कृष्णा मन ही मन संतुष्ट होकर वापिस रथ पे जा बैठे।
धन्यवाद

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें